यीशु के शिष्य के रूप में जीना
यीशु के शिष्य के रूप में जीना
स्थानिय पुरुष, एक नहर के प्रोजक्ट के बारे में बात करते हैं जिसको बनाने की अनुमती तो मिल गयी है मगर अभी तक नहीं बनीहै। सरकार उसे शुरू करने से इनकार करती है और खेतों के मालिक दुखी होते है। उन्हें याद दिलाया कि उन्हें चट्टान तरह अपनी बात का बचाव करना है। परन्तु वह नहीं समझते। उसने उन्हें बताया कि वह सब अब बदल गये हैं यीशु के कारण। उन्हें मजबूत होना होगा और गाँव में शांति बनाए रखने की जरूरत है; चाहे वह अपने कार्य का बचाव क्यों न करें। महिलायें कहती है कि यीशु पर घर बनाना एक नीव के तौर पर, यह एक चट्टान पर घर बनाने के समान है। उनको याद दिलाया गया की जो कुछ उन्होंने सीखा है अभ्यास करें और विश्वास करें। इससे गांव के लोगों में फर्क पड़ेगा। यीशु ने सिखाया है कि सुसमाचार फैलाना बीजों को बोने के समान है। सभी नहीं पनपेंगे। लेकिन कुछ जड़ तक पहुँचेगे और फलवंत होंगे। पुरुष नहर के बारे में चरचा कर रहे थे कि जैसे यीशु लोगों तक पहँुचे उसी प्रकार वह भी गांव में पहुँचेंगे, शांति और एकता से। उन्होंने यीशु की शिक्षाओं का अभ्यास करने का और पड़ोसियों की जरूरतों को पूरा करने की भरसक कोशिश करने का फैसला किया।