यीशु
यीशु ·61 अध्याय
यीशु
यह फिल्म लूका रचित सुसमाचार के द्वारा यीशु का सही परिचय है। यीशु लगातार लोगों को उनके अद्भुत जन्म से लेकर उनके कब्र में से जी उठने के द्वारा आश्चर्यचकित कर रहें। लूका की पुस्तक में से यीशु के जीवन से आश्चर्यकर्म, शिक्षाएँ और जोश का अनुसरण करो। परमेश्वर ने सब की सृष्टि की और मान जाति से प्यार करते है। मगर मानव जाति परमेश्वर की आज्ञाओं का उलंघंन करती है। परमेश्र और मानन जाति अलग हो गए, मगर परमेश्वर मान जाति से बहुत प्यार करती है, उन्होंने उनको बचाने के लिए एक रास्ता तैयार किया। उन्होंने अपने पुत्र यीशु को भेजा हमारे लिए एक सही बलिदान के रूप में सब कुछ सुधारने के लिए। यीशु के आने के पहले परमेश्वर ने मानव जाति को तैयार किया। भविष्यद्वकताओं ने यीशु के जन्म, जीवन और मृत्यु के बारे में बातें की। यीशु लोगों का ध्यान खीचते हैं। वह दृष्टांतों में बातें करते हैं और लोग उसे नहीं समझ सके, वह अन्धों को रौशनी देते है। और उन्होंने उनकी मदद की जो मदद योग्य नहीं समझे जाते। यहूदी अगुवे यीशु से डरते हैं, वह उन्हें एक खतरे के रूप में देखते हैं। यहूदा जो गद्यार था और रोमन शासकों द्वारा यीशु को क्रूस पर चढ़ा देते हैं। वह सोचते हैं कि मामला सुलझ गया है। मगर जो स्त्री यीशु की सेवा करती थी कब्र को खाली पाती है। चेलों में खलबली मच जाती है। जब यीशु सामने आए तो वह उन पर शक करने लगते हैं। मगर वैसे ही हुआ जैसा वह कह रहे थे, वही उनके सही बलिदान हैं, उनके उद्धारकर्ता और मृत्यु पर जय प्राप्त करने वाले। वह स्वर्ग में उठा लिए जाते हैं, वह अपने चेलों के दूसरों को उनके बारे में और उनकी शिक्षाओं के बारे में बताने के लिए कहते है।