Creation to Christ3 of 8Episode 3 of 8
Humanity’s perfect relationship with God was broken and sin entered the world when the man and the woman disobeyed God after being tempted by the devil.
यहोवा परमेसवर नै जितने जंगळी-पशु बणाए थे, उन सारया म्ह तै साँप मक्कार था, अर उसनै जनान्नी तै पूच्छया, “के सच म्ह ए परमेसवर नै कह्या सै, ‘के थम इस बाग के किसे दरखत का फळ ना खाईयों’?” जनान्नी नै साँप तै कह्या, “इस बाग के दरखतां के फळ हम खा सकां सां; पर जो दरखत बाग कै बिचाळै सै, उसके फळ के बारें म्ह परमेसवर नै कह्या सै के ना तो थम उसनै खाईयों अर ना ए उस ताहीं छूईयो, न्ही तो मर जाओगे।” फेर साँप नै जनान्नी तै कह्या, “थम पक्का न्ही मरोगे बल्के परमेसवर खुद जाणै सै के जिब थम उसका फळ खाओगे फेर थारी आँख खुल जावैगी, अर थम भले-बुरे का ज्ञान पाकै परमेसवर कै समान हो जाओगे।” जनान्नी नै देख्या के उस दरखत का फळ खाण म्ह आच्छा, अर देखण म्ह मनोहर, अर बुद्धि देण कै खात्तर चाहण लायक भी सै, फेर उसनै उस म्ह तै तोड़कै कुछ खाया; अर कुछ अपणे पति तै भी दिया, जो उसकै गेल्या था दोनुआ नै मिलकै खाया। फेर उन दोनुआ की आँख खुलगी, अर उननै बेरा पाट्या के वे नंगे सैं; ज्यांतै उननै अंजीर के पेड़ के पत्ते जोड़-जोड़कै अपणा शरीर ढक्कण खात्तर लंगोट बणा लिये।
हरियाणवी भाषा म्ह पवित्र शास्त्र
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