Love Your Neighbor5 / 14अध्याय 5 / 14
एक आदमी एक बच्चे के कमरे को साफ रखता है और उस कमरे का ख्याल भी रखता है। परन्तु उनकी बेटी एक मधुशाला में मदिरा का सेवन कर रही है। वह याद करती है कैसे उसने अपने पिता से रुपये चुराकर, घर से भाग गई थी। पिता अपनी छोटी सी बेटी को याद करता है। मधुशाला में एक टिन का कैन बेटी के सामने खिसकता है। बहुत पहले कभी, वह आदमी और उसकी बेटी एक दूसरे से बात करते हुए टिन कैन से खेला करते थे। लेकिन एक आदमी मधुशाला में उस बेटी के साथ बैठा होता है और टिन का कैन उसकी तरफ से दूर खिसका देता है। वह दोनों साथ में मदिरा का सेवन करते हैं और वह बेटी उस आदमी के साथ उसके घर चली जाती है। उस बेटी को बहुत ही गंदा महसूस होता है और वह अपने घर की और भागती है। वहीं दूसरी ओर, उसके पिता उठ बैठते है और एक और टिन कैन बनाते हैं। वह इस कैन को एक सुंदर लाल पतंग से जोड़कर, उसे खुले आकाश में ऊँची उड़ान भरने के लिए छोड़ देते है। यह पतंग उसकी बेटी के घर उतरती है और पिता-बेटी एक दूसरे से बात करने की कोशिश करते हैं। पर इतनी दूरी से एक दूसरे की बात सुनना कठिन होता है। धागे को बार बार तोड़ कर जोड़ते हुए वे दोनों एक दूसरे की और बढ़ते हैं, ताकि एक दूसरे के नज़दीक हो सकें और आवाज़ को साफ साफ सुन सकें । इसके पश्च्यात बेटी बस में सवार हो जाती है और उसके पिता बस स्टाॅप पर उसका इंतजार करते हैं। वे दोनों अपने अच्छे बुरे दिन याद करते हैं। जैसे ही बस रुकती है, बेटी अपने पिता को खुश होता देखती है। दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुराते हैं। पर तभी बेटी कैन गिरा देती है और बस में फिर से सवार हो जाती है। उसकी सीट पर एक और टिन कैन रखा हुआ है। क्या होता है बेटी को जब वह भाग जाती है? कहानी के अंत में बेटी क्या चाहती है? बेटी को बस से उतरने के लिए क्या रोकता है? क्या आप कभी किसी से समाधान करने की कोशिश में असफल रहें? यह फिल्म सीधे से सुसमाचार नहीं बताती लेकिन एक ऐसी चर्चा से हमारी पहचान कराती है जो सुसमाचार की जरूरत को दर्शाती है। सोचिए कि कैसे इस फिल्म और यीशु मसीह की कहानी आपकी और आप के साथ यह फिल्म देखने वाले अन्य लोगों की कहानियों के साथ संबंध जोड़ती है। इस फिल्म की कहानी एक ऐसी कहानी से प्रेरित है जो यीशु मसीह ने सुनाई थी और बाइबल में दर्ज की गई है। यह कहानी एक उड़ाऊ पुत्र की है जो लूका 15:11-32 में दर्ज की गई है। कहानी एक पिता और उनके दो बेटों के बारे में है। छोटे बेटे को अपने पिता से ज्यादा उनकी धन दौलत से प्यार था। वह घर से अपनी आधी विरासत लेकर चला जाता है और एक पराये देश जाकर अपना धन बिना सोचे समझे खरच करने लगता है। जल्द, ना ही उसके पास धन रहता है और न ही कोई साथी और वह एक नाली में मरने की दशा में होता है। वह अपने पिता के उनके सेवकों के प्रति अच्छे व्यवहार को याद करता है। वह अपने घर वापिस जाने का और अपने पिता का सेवक बनने का निर्णनय लेता है। हैरत की बात है कि जब वह अपने घर पहुँचा तो उसके पिता ने प्रेम और उत्साह से उसका स्वागत किया और उसे हँसी-खुशी फिर से परिवार में शामिल किया। परन्तु छोटे भाई के प्रति पिता का यह व्यवहार देखकर बड़े बेटे को क्रोध आया। वह सोचता है कि उसने अपनी पूरी जिंदगी नियमों का पालन किया तो उसे अपने पिता से ज्यादा प्यार और श्रेय मिलना चाहिए। भले ही हमने जीवन में कुछ भी किया हो पर परमेश्वर हमें पाना चाहते है और हमारे साथ व्यक्तिगत संबंध बनाना चाहते है। यदि हम कहानी में बताए गए छोटे बेटे (या फिल्म में दिखाई गई बेटी) की तरह विद्रोही हो या बड़े बेटे की तरह सभ्य व्यवहार द्वारा हेरफेर कर अपने पिता का पक्ष प्राप्त करने की कोशिश करें, परमेश्वर फिर भी हमसे संबंध मे जुड़ना चाहते हैं। परमेश्वर से यह व्यक्तिगत संबंध रखनें के लिए हमें यह मानना चाहिए कि हम गुनहगार हैं और हमारे गुनाह हमें परमेश्वर से दूर रखते है। हम खुद से ऐसा कुछ नहीं कर सकते हैं जिससे हम परमेश्वर से जुड़ सकें। सिर्फ परमेश्वर के पुत्र, यीशु मसीह, हमें परमेश्वर से जोड़ पाए अपनी मृत्यु और उसके पश्चात जी उठने के द्वारा। स्वर्गीय पिता को जानने के लिए हमें व्यक्तिगत रुप से यीशु मसीह को अपना उद्धारक और प्रभु मानना चाहिए।