2 / 4क्लासिक · 4 अध्याय

बच्चों के लिए यीशु की कहानी

पहली सदी में, एक बच्चों का ग्रुप इकट्ठा हुआ और वह यीशु के बारे में जो उन्होंने सुना और देखा था उसके बारे में बातें करने लगे। कुछ विश्वास करते थे कि यीशु परमेश्वर के पुत्र हैं। मगर कुछ सोचते थे यीशु लोगों को भरमाते थे। बच्चें यीशु के पीछे चलते, उनके आश्चर्यकर्मो के गवाह बनते, और उनकी शिक्षओं को सुनते थे यीशु लड़की को मुर्दों में से जिलाते है, अपूर्ण लोगों को जैसे चुंगी लेने वालों को अपने पीछे हो लेने के लिए बुलाते थे, और सभी को यह शिक्षा देते थे कि नम्र और दयालु और अनुग्रहकारी हों एक दूसरे के लिए और एक स्त्री को अपने पैरो को आँसुओं से धोने दिया। वह दृष्टांतो में शिक्षा देते थे जिसे कोई भी समझ नहीं पाया, प्रचण्ड तूफान को शांत किया, अंधो को रौशनी दी, और उनकी मदद की जो जिसे कोई भी मदद योग्य नहीं समझ नहीं सकता था। उन्होंने बच्चों को एक हैरतअंगेज, सामर्थी और दयामय जीवन दिखाया। बेन्जामिन और सारा ने बच्चों से यीशु की कहानी के बारे मंे बात की कि वह क्या समझते हैं कि वह कौन है और उन्हें अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वकार करने के बारे में।

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