(यूहञा रचित सुसमाचार) यीशु का जीवन ·13 / 49

पुत्र का गवाह

यीशु ने यहूदी नेताओं को उस पर विश्वास न करने और मूसा के लेखन के लिए प्रेरित किया है जो यीशु के मसीहा होने के पूर्वसूचक हैं, वे न तो इस बात पर विश्वास करते हैं जों यहूत्रा बपतिस्मा देनें वाले ने उन्हें बतायी और यहां तक ​​कि उस पर भी नही कि यीशु का स्वयं का जीवन और उनकी असली पहचान और जों वह काम करता था .वह उनकें दिलों की सच्ची स्थिति को उजागर करता है क्योंकि वह पुरुष सुखी हैं न कि परमेश्वर प्रेमी.

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