नये विश्वासी पाठ्यक्रम·4 / 10

4. परमेश्वर की क्षमा

यीशु ने अपनी मृत्यु, दफ़न और पुनरुत्थान के ज़रिए परमेश्वर के पास वापस जाने का रास्ता दिखाया है। हम विश्वास के ज़रिए परमेश्वर की ओर इस यात्रा का अनुभव कर सकते हैं।

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परमेश्वर की क्षमा प्राप्त करने का क्या अर्थ है? हालांकि यीशु हमें हमारे पापों से मुक्त करने के लिए मरे, केवल उनके जीवित होने पर विश्वास करने से हम स्वतंत्र नहीं होते। परमेश्वर की क्षमा सही मायनों में प्राप्त करने के लिए, अपनी स्वार्थी इच्छाओं की बजाय हमें अपना हृदय उन पर और उनकी भलाईयों पर लगाते हुए, उन्हें हमको बदलने देना होगा। इस पर विचार करें। यदि आप किसी से क्षमा मांगते हैं, लेकिन आपके अन्दर अपने व्यवहार में परिवर्तन लाने की मनसा नहीं है, तो क्या आपको सच में अपनी गलती का एहसास हुआ? बिलकुल नहीं। क्योंकि आप उन्हें मन से प्रेम करना नहीं चाहते हैं। फिर भी यीशु ने हमारे लिए अपने प्राण देकर तथा फिर से जी उठकरपुनःजीवित होकर, यीशु ने हमारे प्रेम और घनिष्टता को हासिल किया खरीद लिया है। और जो प्रेम व क्षमा वह हमें प्रदान करते हैं वही हमें आनंद के साथ ऐसा जीवन जीने की शक्ति देते हैं जिसमें सेवा, शुद्धता, तथा उसके द्वारा दी गई स्वतंत्रता शामिल है। यह एक जीवन यात्रा है जिसके लिए परमेश्वर सामर्थ्य प्रदान करते हैं जब हम हर रोज उनपर निर्भर होते हैं। फिर भी हम लोग रास्ते में भटक जाते हैं, क्योंकि हम मनुष्य हैं। So when you fail, इसलिये, जब भी आप असफल हों, तो यह याद रहें कि परमेश्वर ने आपको अपनी संतान के रूप में चुना है। उन्होंने आपको तब क्षमा किया जब आप उनके शत्रु थे, आप भरोसा कर सकते हैं कि वह अब भी आपको क्षमा करेंगे।
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