नये विश्वासी पाठ्यक्रम·5 / 10

5. उद्धारकर्ता, प्रभु और मित्र

जब हम परमेश्वर की क्षमा प्राप्त करते हैं, तो यीशु के साथ हमारा रिश्ता किस प्रकार बदल जाता है? विवरण: जब हम परमेश्वर की ओर मुड़ते हैं और बुराई से दूर हो जाते हैं, तो वह हमारा जीवन बन जाता है और हमारे मन को नया कर देता है।

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परमेश्वर से क्षमा पाने के बाद, यीशु के साथ हमारा रिश्ता कैसे बदला जाता है? हर एक जन निष्कलंक जीवन जीने में असफल रहा है। इसी कारण हमें पता है कि हम हर बात के लिए परमेश्वर पर निर्भर हैं। हमें क्षमा प्रदान करने के साथ एक नया जीवन देने के कारण, परमेश्वर हमारे उद्धारकर्ता बन जाते हैं। उस नए जीवन को जीने की शक्ति प्रदान करने के कारण, वह हमारे प्रभु भी बन जाते हैं। प्रभु वह हैं, जो अपने दासों की मार्गदर्शन करते हैं और वे अनुसरण करते व आज्ञा मानते हैं। वह अपने दासों की सुरक्षा करते, और भरपूरी का जीवन जीने व सेवा के लिए सारी आवश्यक वस्तुओं को मुहैय्या कराते हैं लेकिन वह केवल हमारे प्रभु ही नहीं हैं। वह हमारे सबसे घनिष्ट मित्र भी बनना चाहते हैं। यीशु ने अपनी मृत्यु से पहले, असल में अपने चेलों को मित्र कहकर पुकारा। जीवित होने पर, वह सबसे पहले अपने मित्रों के साथ भोजन करना चाहते थे। उन्होंने उनको अपने हाथों और अपनी पसली के घाव दिखाए। यह दिखाने के लिए वह मरे और फिर जी उठे, क्योंकि वह उनसे प्रेम करते थे, और वह सदा के लिए उनके ही साथ रहना चाहते हैं और हर दिन, वह हमारे साथ हैं, वह हमें क्षमा, मागदर्शन और शक्ति प्रदान करते हैं और हमें सारे शत्रुओं से बचाते हैं। और हमारे भीतर बसी बुराई से भी। हमारे उद्धारकर्ता, प्रभु और एक मित्र के रूप में।
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