रिवका·8 / 12

दिये साफ़ करना

मरियम अपने माता-पिता के बारे में चिंता करती और कहती है कि में कैसे याकूब की पत्नी बनूँ। तब रिवका उसे समझाते हुए कहती है कि जैसे-जैसे वह परमेश्वर को समर्पित होते जाएँगें वह बहुत बढ़ते जाएगे। तब उस चिराग की ओर संकेत करते हुए जिसे वे साफ कर रही हैं कहती है कि हम सब के जीवन का एक ही उदेश्य है और वो है प्रकाश देना। परमेश्वर हमे चिराग की मानिंद सोचे हैं। हमें चमकना है क्यों हम इसलिए बनाए गए है। रिवका ऐसी स्त्रियों का वर्णन करती है जिन्होने अंधकारमय परिस्थितियों में भी चमकना सीखा। ऐसी परिस्थ्यिति में सिर्फ उन्हे परमेश्वर पर निर्भर होना था ताकि वो उन्हे भरे और उनके द्वारा अपनी महिमा करे। एक स्त्री को अपने शादी - शुदा जीवन पर भरोसा रखने से बेहतर है अपने समस्त गुणो के सथ परमेश्वर की सेवा करना है। जैसा वचन बताता है ‘‘कि तुम जगत की ज्योति हो, और जो नगर पहाड़ पर बसा हो वह छिप नहीं सकता।’’ लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते है कि आने - जाने वाले लोगों तक प्रकाश पहँुचे। ठीक उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला दूसरों तक पहूँचे ताकि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर उस परमेश्वर की जो स्वर्ग में है तारिफ करें। (मत्ती 5ः14-16) हमें उत्तम व्यक्तित्व, इच्छाएँ और उपहार मिलें है ताकि हम उनके द्वारा परमेश्वर की बढ़ाई कर सके। जैसा की गुणो के विषय में दृष्टांतों ने बताया गया है। परमेश्वर हम से ये चाहता है कि हम उन गुणो के द्वारा जो उसने हमें दिया है दूसरों की भलाई के लिए प्रयोग कर उस की बढाई करें।

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Matthew 5:14-16
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प्रतिलेख

Hindi (हिंदी)
रिवका। चिराग साफ़ कर रही है। मां, देखती हूं कि फाटक पर कौन है। और जब वापस आऊंगी तो... तुम्हें कुछ और सूप पीना पड़ेगा। याकूब! चाचा। आइये आइये। स्वागत है और... कृपया अंदर आइये । मां! पिताजी! याकूब और उसके पिताजी यहां हैं। मैं उनके लिए क्या करूं? ठीक है, उन्हें सामने के कमरे में बिठाओ मरियम। और उनके लिए भोजन बनाओ। मैं कुछ ही देर में वहां आता हूं। कृपया अंदर आइए। पिताजी कह रहे हैं कि वे कुछ ही देर में आपके साथ होंगे। मैं। हमें ख़ुशी है आपको यहां देखकर।। आप इसे अपना ही घर समझें। नोआ! पानी लाओ और मेहमानों का हाथ धुलवाने में मदद करो। जल्दी! ठीक है, ठीक है। हां, तुम्हें क्या चाहिए? याकूब और उसके पिताजी यहां हैं! हमें खाना बनाना है! जल्दी आओ! ठीक है, मैं जितनी जल्दी हो सका आती हूं। जल्दी! शांत रहो, मरियम। नहीं पिताजी। मुझे आपकी मदद करने दीजिए। इसे पहनने में उनकी मदद करो। आह, ये ठीक है। मुझे उनके पास ले चलो मूसा। सलाम मूसा चाचा। याकूब। कृपया बैठो। तुमसे मिल कर अच्छा लगा, मूसा। तुम्हारी बीमारी का सुन कर बुरा लगा। मैं प्रार्थना करता हूं कि परमेश्वर तुम्हें जल्दी ही ठीक करे। काश परमेश्वर आपकी प्रार्थना सुनें। हां। मैं तुम्हारी क्या मदद कर सकता हूं मेरे दोस्त! आज मैं आया हूं, अपने बेटे याकूबके लिए। ये अच्छा जवान लड़का है, और मैं सोचता हूं कि ये तुम्हारी बेटी का पति बनने के लिए ठीक रहेगा। और तब याकूब के पिता ने पिताजी से पूछा कि क्या वे दहेज कम करेंगे। उन्होंने कहा कि समय कठिन है और कोई नहीं जानता कि कल क्या होगा। वे चाहते हैं कि हमारा विवाह बारह के बजाय तीन महीनों में ही हो जाए। तुम्हारे पिताजी ने क्या कहा? वे राज़ी हो गए। तीन महीनों में हमारा विवाह होना था। वे अय्यूब को लाए और उन्होंने सहमतिपत्र पर हस्ताक्षर किए। और फिर याकूब ने मुझे ये गले का हार दिया। ऐसा प्यारा हार, तुमने पहले देखा है? ये है मेरी प्रिय, ये प्यारा है। परन्तु, चाची, मैं नहीं जानती मेरे बिना मां और पिताजी कैसे रहेंगे। मैं याकूब के लिए बहुत उत्सुक हूं, परन्तु दूसरी तरफ़... तुम और याकूब उनकी मदद के लिए कोई रास्ता निकाल लोगे... मिल कर। और सारा और अय्यूब भी वहां हैं। परन्तु सारा बहुत बीमार है। वो हमेशा बीमार नहीं रहेगी बच्चे। वो एक बच्चे को जन्म देने वाली है। मैं जानती हूं, परन्तु वो और अय्यूब बच्चा के पैदा होने के बाद अपने परिवार के पास जा कर रहना चाहते हैं। जब कभी भी उनके जाने का ठीक समय आएगा, वे चले जाएंगे। परमेश्वर उनका मार्गदर्शन करेगा । जैसा वह तुम्हें और याकूब को मार्गदर्शन देता है जब तुम आपस में बातें करते और प्रार्थना करते हो, और उसके पीछे चलते हो। मां ने हमसे हमेशा कहा... कि हमें समर्पित पत्नियां बनना है। और एक दिन हमें अपने अपने पतियों के परिवारों में रहना है। परन्तु यदि मां और पिताजी को मेरी ज़रूरत हुई... समर्पण विश्वास का कार्य है, मरियम। हमने एक साथ रहना शुरू भी नहीं किया है और मैं अभी से दुविधा में पड़ गई। ओह चाची, मैं तो ये भी नहीं जानती कि खुद कैसे बनूं, और अब मुझे ये करना है कि एक पत्नी कैसे बनूं? तीन महीनों में? मैं ऐसा कर ही नहीं पाऊंगी। मरियम, समर्पित पत्नी बनने का मतलब ये नही है कि तुम तुम नहीं हो। जैसे जैसे याकूब तुम्हें प्रेम करना सीखता है, और तुम उसको समर्पित होना, और परमेश्वर के सामने परस्पर समर्पित होना सीखते हो, तुम परमेश्वर ने जैसा अनोखा होने के लिए तुम्हें बनाया था बन जाओगी। तो, याकूब से विवाह करना मुझे एक बेहतर व्यक्ति या ‘मैं’ बनाएगा। मैंने ये नहीं कहा मरियम। हमारे मूल्य और परिपक्वता विवाह करने, या न करने से नहीं आते। हम में से हर एक के पास अपना रास्ता है। और हम बढ़ते हैं,परमेश्वर की आज्ञा मानने से, उसकी सेवा करने से और दूसरों की सेवा करने से। मैं मां और पिताजी की सेवा करना चाहती हूं। तुम्हें इस बारे में याकूब से बात करनी चाहिए। तुम्हारा मतलब अभी? अब तुम एक साथ अपना जीवन जीने की योजना बना रहे हो? नहीं? हां, मैं समझती हूं। और निर्णय लेना? हां। ठीक, तो तुम उसे अपने नज़रिए का फ़ायदा दो। ये न हो कि वो सोचता रह जाए कि तुम क्या सोच रही हो। उसे जानने दो कि तुम्हारे लिए महत्वपूर्ण क्या है। ये नही कि तुम उस पर ज़ोर डालो कि जैसा तुम चाहती हो वो वैसा करे। परंतु इसलिए कि वो अच्छे निर्णय ले सके। तुम्हारे पास वो अंर्तदृष्टि है। जिसकी उसको जरुरत है मरियम, इन सारे चिरागों को देखो... जिन्हें आज हम साफ़ कर के तेल से भर रहे हैं। ये कितने सुंदर है। तुम्हारे पास कई तरह के हैं। मुझे चिरागों से प्यार है। परन्तु देखो, उन सबका एक ही उद्देश्य है, वो है... ... चमकना। बिल्कुल । परन्तु कितने विभिन्न् तरीकों से वे चमकते हैं। ये वाला दीवार पर सुन्दर आकृतियां बनाता है। और ये वाला मेरे पति के बही पर तेज़ रौशनी डालता है। जब वो रात में काम करते हैं और ये वाला बहुत चमकीला है। और वो हलकी रौशनी देता है। सारे चिरागों में... एक सामान्य बात है। उन सबको जलाए जाने से पहले सफ़ाई की और तेल भरे जाने की ज़रूरत होती है, परन्तु फिर हर एक का अलग प्रभाव होता है जो दूसरों से बिलकुल फ़र्क होता है। यीशु ने कहा तुम और मैं चिरागों के समान हैं, मरियम। उसने हमसे कहा कि अपनी रौशनी चमकने दो । हमारे जीवन का उद्देश्य है कि संसार में परमेश्वर की ज्योति के साथ चमकें, परन्तु हममें से हर एक थोड़ा अलग तरह से चमकता है। तो, मैं एक चिराग के समान हूं। हां, जहां कहीं भी तुम जाओ तुम्हारा मकसद तो एक ही है, अपनी रौशनी को चमकने दो। कभी कभी मैं सोचती हूं कि मैं रौशनी को बुझा रही हूं। जैसे जब मैं सारा से बहस करती हूं। ओह, हा, हा, हा, हा, हा, हम सब पर ये समय आता है। ओह, परन्तु तुम, मैं सोचती हूं कि तुम एक विशेष सुंदर चिराग हो। तुम जिस किसी भी घर में जाओ, चमकना याद रखो क्योंकि परमेश्वर ने खासकर तुम्हें चमकने के लिए बनाया है। तुम्हारी सुंदरता परमेश्वर के सामने वो बनने से आती हैं जिसके लिए उसने तुम्हे बनाया हैं। कुछ बहुत ही सुंदर स्त्रियां जिन्हे मैं जानती हूं। और मैं अंदर की सुंदरता की बात कर रही हूं, वो चमकने वाला गुण। उन्हे चमकना ही पड़ा । सबसे अंधेरे समयों में, और सबसे अंधेरे स्थानों में। उन्हें परमेश्वर पर निर्भर होना था चिरागों में तेल भरने के लिए। रोज । हर पल । हर क्षण । परन्तु फिर वो उनके द्वारा ऐसी रोशनी से चमकता है कि तुम्हारी सांसे ही रुक जाएं। अंधेरा समय कैसा होता है? पति खोने का, या बच्चा खोने का। युद्ध या अकाल का। बहुत सी चीज़ें हैं। उससे तुम्हें डर लगता है? नही, बच्चे। अगर हम उन सारी बुरी बातों को सोचने की कोशिश करें, जो हम पर हो सकती हैं ये बहुत कठिन होगा। लगता है तुम हमेशा अंधेरे समयों चमकती हो। हो, हो, हो, मुझे ये नहीं पता। हमेशा वैसा नहीं चमकती जैसा मुझे चमकना चाहिए। क्या तुम कभी सोचती हो कि तुम्हारी जि़ंदगी आसान होती अगर तुम्हारा विवाह नहीं हुआ होता। आसान? नहीं, मैं ऐसा नहीं सोचती। मैं सोचती हूं ये दूसरी तरह से कठिन होती। देखो मरियम, हम में हर एक के पास अलग-अलग वरदान और अवसर हैं। और जो परमेश्वर ने मुझे दिया है उसका उसे हिसाब दूंगी। मेरा वरदान, और मैं कौन हूं, ये नहीं बदलता अगर मैं विवाहित नहीं भी होती। सारा की एक मित्र है जो अविवाहित है मैं सोचती हूं दूसरी लड़कियां इसी वजह से उसे नीचा देखती हैं। कई लोगों की सोच में लड़की के जीवन का उद्देश्य केवल विवाह करना ही है। परन्तु मेरा विश्वास है कि हमारा उद्देश्य होना चाहिए परमेश्वर की सेवा करना चाहे हम किसी भी परिस्थिति में क्यों न हो। चाहें हम विवाहित हों, या अकेले हों, या विधवा, जैसे नोरा। हममें से हर एक के पास वरदान और प्रतिभा है और जहां कहीं परमेश्वर हमें रखे हमें उन वरदानों का अच्छी तरह इस्तेमाल करना है। चाहे हमें अपने बारे में निश्चित न हों। हां फिर भी। यीशु ने इस बारे में एक कहानी सुनाई। एक आदमी यात्रा पर जा रहा था। और उसने अपने सेवकों को बुलाया... और अपनी संपत्ति उनके बीच बांट दी। एक को उसने सिक्कों से भरे पांच थैले दिए और दूसरे को... दो थैले। और फिर दूसरे को उसने एक थैला दिया।। हर एक को उसकी योग्यता के अनुसार। काफ़ी लंबे अरसे बाद, इन सेवकों का स्वामी लौटा और उनसे हिसाब लिया। जिस सेवक को पांच थैले मिले थे उसने कहा, स्वामी, आपने मुझे पांच थैले दिए थे। देखिए, मैंने उन पैसो को व्यापार में लगाया और पांच और कमाए। उसके स्वामी ने कहा, शाबाश, अच्छे और ईमानदार सेवक! तू थोड़े में ईमानदार रहा। मैं तुझे बहुत सी चीज़ों का अधिकारी बनाता हूं। आ, और अपने स्वामी की प्रसन्नता में सहभागी हो! जिस सेवक को सिक्कों के दो थैले मिले थे वो भी आया। स्वामी, उसने कहा, आपने मुझ पर विश्वास करके पैसों के दो थैले दिए थे। देखिए, मैंने दो और कमाए। उसके स्वामी ने कहा, शाबाश, अच्छे और ईमानदार सेवक! तू थोड़े में ईमानदार रहा। मैं तुझे बहुत सी चीज़ों का अधिकारी बनाता हूं। आ, और अपने स्वामी की प्रसन्नता में सहभागी हो! तब जिस सेवक को सिक्कों का एक थैला मिला था वो भी स्वामी के पास आया और उसने कहा, मैं जानता हूं कि आप कठोर मनुष्य हैं, जहां नहीं बोया वहां काटते हैं, जहां बीज नहीं बिखेरते वहां से बटोरते हैं? इसलिए मैं डर गया और मैंने आपका पैसा भूमि में गाड़ दिया। देखिए, आपका पैसा ये रहा। स्वामी ने उत्तर दिया, हे दुष्ट, और सुस्त सेवक! सो, जब तू जानता था कि जहां मैं बीज नहीं बोता वहां से काटता हूं, तब तो तुझे वो पैसा साहूकारों को दे देना चाहिए था, तो जब मैं वापस आता तो उनसे ब्याज समेत वापस ले लेता। और मालिक ने उस सेवक को दण्ड दिया कि जो धन उसे दिया गया था उसे उसने सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया। परमेश्वर ने हममें से हर एक को धन दिया है मरियम। चाहें हम विवाहित हों, या अकेले, बच्चे वाले हों या बिना बच्चों के, धनी या निर्धन । उसने हममें से हर एक को अलग-अलग वरदान या प्रतिभाएं दी हैं। परन्तु जो भी परमेश्वर ने हमें दिया है हमें उसका मूल्य समझना है और उसका पूरा इस्तेमाल करना है। उन स्थानों या संबंधों में जो उसने हमें दिए हैं। जब हम ऐसा कर चुकेंगे, हम उसके पास ऊपर जाने के योग्य हो जाएंगे। और अंतिम दिन उसे आमने-सामने देखेंगे और उसके साथ सदा का आनन्द मनाएंगे। और उस दिन हम वास्तव में चमकेंगे। वो हम में चमकेगा! मरियम, मैं चाहती हूं कि तुम इस चिराग को ले लो। इसे मेरी तरफ़ से अपनी मंगनी का तोहफ़ा समझो। और जब तुम इसे देखोगी, तो परमेश्वर ने जो कुछ तुम्हें दिया है सोचना और याद रखना कि तुम जहां कहीं भी जाओ परमेश्वर के प्रेम से चमक रही हो। परन्तु चाची, ये बहुत सुंदर है। मैं इसे नहीं ले पाऊंगी। प्रिय। ये इतना अच्छा नहीं है! तुम परमेश्वर की संतान हो। तुम स्वर्ग के राज्य में एक राजकुमारी हो। तुम राजाओं के राजा और प्रभुओं के प्रभु की छोटी बहन हो! तुम ले लो इसे तुम जो भी करो, कहीं भी जाओ, तुम मसीह में क्या हो। ये हमेशा याद रखो, परन्तु मैं, मैं नहीं ले सकती! ओह... तुम्हें ले लेना चाहिए। मैं ज़ोर दूंगी। मैं तुम्हें बिना इसके जाने नहीं दूंगी। मुझे याकूब के साथ बहुत सी बातें करनी है, परन्तु मुझे मां और पिताजी के पास जाना है। तुम इसके बिना नहीं जा सकती। एक लड़की आपसे मिलना चाहती है। अंदर ले आओ उसे। दलाया! क्या बात है? मुझे दखल देने का दुख है, परन्तु, उम्म, आह, मेरी मां बहुत बीमार है, और मैंने सुना है कि आप में परमेश्वर की ओर से ठीक करने की सामर्थ है। क्या आप आकर मेरी मां की मदद करेगीं? उम्म, मेरे पास अपनी कोई सामर्थ नहीं है, परन्तु परमेश्वर करता है। मैं आऊंगी , और अपनी दवाएं भी लाऊंगी, और मैं हमेशा तुम्हारी मां के लिए प्रार्थना कर सकती हूं। मैं तुम्हारे साथ आऊंगी। ये मेरे घर के रास्ते में हैं। तुम लड़कियों चलो। मैं पहुंच रही हूं। धन्यवाद देबरा। मरियम, वो गले का हार कैसा है? मेरा विवाह याकूब से होना है। तीन महीनों में! ओह मरियम ये अद्भुत है! तुम भाग्यशाली हो। मैं नहीं सोचती कि विवाह करूंगी। ओह ऐसा न कहो। मैं तो तुम से बड़ी हूं, मरियम। परन्तु दलाया, परमेश्वर की नज़रों में महत्वपूर्ण होने के लिए पति का होना ज़रूरत नहीं है। वो हम जैसे भी हैं हमसे प्रेम करता है। याकूब से विवाह के लिए मरियम की क्या चिंताएं और डर हैं? मरियम की चिंताओं और डर का रिवका ने क्या जवाब दिया? रिवका हर एक स्त्री और पुरुष के मूल्य और उद्देश्य के लिए क्या कहती है? आपके विशेष वरदान और प्रतिभाएं क्या हैं? सिक्कों का ये दृष्टांत हमारे वरदानों के बारे में क्या कहता है?
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