3 / 61यीशु · 61 अध्याय

यीशु का बचपन

बच्चे के जन्म के एक सप्ताह के बाद, उसका खतना किया गया। और नाम यीशु रखा। जब यीशु छोटे बालक थे, वह सब मंदिर गए और वहाँ एक शमौन नामक आदमी से मिले। शमौन को पवित्रआत्मा से आश्वासन मिला था कि जब तक वह प्रभु मसीह को नहीं देखेंगे वह नहीं मारेंगे। शमौन ने यीशु को देखा और उन्हें ही मसीह घोषित किया।

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Luke 2:21-52
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Hindi (हिंदी)
एक हफ्ते के बाद, जब बालक के खतने का समय आया तो उसका नाम यीशु रखा गया। युसुफ़ और मरियम बालक को परमेश्वर के सम्मुख प्रस्तुत करने यरूशलेम ले गये। अराधनालय में शिमौन नामक एक धर्मी और भक्त पुरूष थे जिन्हे पवित्र आत्मा से आश्वासन मिला था कि जब तक वे बालक मसीह का दर्शन न कर लें मृत्यु को न देखेंगे। परमेश्वर, अब आप अपने सेवक को अपने वचन अनुसार शांति से अपने पास बुला ले. मेरी आँखों ने आज आपके उद्धार को देख लिया है. ये बालक परमेश्वर का चुना हुआ है. तुम दोनों को आशीष मिले. मूसा की व्यवस्था अनुसार जब वे धार्मिक कर्तव्यों को पूरा कर चुके तो यरूशलेम से वापस नासरत लौट आये। जब यीशु बारह वर्ष के हुए तो मरियम और युसुफ उन्हें फसह के पर्व के लिये यरूशलेम ले गये। लौटते समय उन्होंने सोचा कि बालक यीशु उनके साथ हैं परन्तु यीशु पीछे ही छूट गये थे। उन्हें ढूंढने के लिये वापस शहर लौटे और तीसरे दिन यीशु को आराधनालय में धार्मिक गुरुओं के साथ वार्तालाप करते पाया। ये किसका पुत्र है जो ऐसे प्रश्न पूछता है ? हम नासरत से है . हमने सोचा ये हमारे साथ ही हैं. कृप्या आप इसे क्षमा किजिए। बालक यीशु की बातों ने सब को चकित कर दिया। बेटा, तुमने हमारे साथ ऐसा क्यों किया ? तुम्हें ढूँढ़ते ढूँढ़ते तुम्हारे पिता जी और मैं कितने चिंतित थें। आप मुझे क्यों ढूँढ़ते थे? क्या आप नहीं जानते कि मुझे परमपिता के कार्यों को पूरा करना हैं। और यीशु उनके साथ नासरत लौटे और परमेश्वर एवंम मनुष्य के अनुग्रह में बुद्धि और शरीर से बढनें लगें।
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