खंड
पहाड़ी से यीशु का उपदेश
4 मि॰FHD
यीशु·12 / 61क्लिप 12 / 61
पहाड़ी से यीशु का उपदेश
फिर यीशु सिखाते हुए लोगों के झुण्ड में से होकर चले। उन्होंने हर एक को समझाया की कैसे प्यार के द्वारा इस जीवन का सफर तये करें। और बताया की कैसे हम अभिमान में दूसरों को परखते हैं। जो उन्हें सुन रहे थे उनसे वह विनती भरे शब्दों में बोले कि अपने दुश्मनो से भी प्यार करो। जितना तुम्हे बताया गया है उससे भी ज्यादा बढ़कर दूसरों की सहायता करो। दूसरों के साथ वैसा करो जैसा तुम चाहते हो की वह तुम्हारे साथ करे।
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प्रतिलेख
Hindi (हिंदी)
अट्ठारह...
उन्नीस...
बीस
मेरे पास बस इतना ही है.
क्या मतलब है तुम्हारा इतना ही है तुम्हारे पास.
हाय तुम पर जो अब धनी हो,
तुमने आराम का जीवन बिता लिया.
( हंस रहा है )
जो धनी न बनना चाहे. वो कोई पागल ही होगा.
हाय तुम पर जो अब हँसते हो,
तुम रोओगे और विलाप करोगे.
अफसोस, जब लोग तुम्हारी बड़ाई करें
क्योंकि उनके पूर्वजों ने भी झूठे भविष्यवक्ताओं के लिये यही किया
पर मैं तुम लोगों से कहता हूँ
शत्रुओं से प्रेम रखो.
घृणा करने वालों का भला करो !
जो श्राप दें उन्हें आशीष दो !
बुरा करने वालों के लिये प्रार्थना करो,
तुम्हारे एक गाल पर कोई थप्पड़ मारे
तो उसकी ओर दूसरा भी फेर दो.
कोई तुम्हारा अंगरखा ले तो अपनी कमीज भी उसे दे दो.
किसी भी मांगने वाले को मना मत करो.
यदि कोई तुम्हारी वस्तु ले ले
तो उसे वापस मत मांगो.
तुम वही करो
जैसा व्यवहार तुम दूसरों से चाहते हो.
यदि तुम अपनों से प्रेम रखने वालों से प्रेम रखते हो
तो तुम्हें आशीष क्योंकर मिलेगी.
पापी भी अपने प्रेम रखने वालों से प्रेम रखते हैं
और यदि स्वयंम पर भलाई करने वालों की भलाई करते हो
तुम क्योंकर आशीष पाओगे.
पापी भी ऐसा ही करते हैं.
वे इसे कैसे छू सकते है?
वो उससे कैसे बात कर सकता है.
बेशर्म
नहीं
शत्रुओं से प्रेम रखो.
उनका भला करो
उधार देकर वापसी की आशा न रखो.
तब तुम्हें बड़ा प्रतिफल मिलेगा,
तुम परमप्रधान परमेश्वर की संतान ठहरोगे,
वो दुष्टों और आभार न मानने वालों पर भी कृपालु है,
दयावंत बनो
जैसा तुम्हारा परमपिता दयावंत है.
येशु ! हमें बचाइये !
आरोप मत लगाओ तो तुम पर भी नहीं लगेगा.
दोष मत लगाओ,
तो तुम पर भी दोष नही लगेगा.
क्षमा करो
तो तुम्हें भी क्षमा मिलेगी,
प्रभु हमें अपने मार्ष पे चलायें.
दो तो तुम्हें भी दिया जाएगा.
जिस नाप से नापोगे उसी से तुम्हारे लिये भी नापा जायेगा.
अंधा अंधे को मार्ग नहीं दिखा सकता,
ऐसा करने पर दोनों ही गड्ढे में गिरेगे,
अपने भाई की आँख के तिनके को क्यों देखते हो जबकि अपनी ही आँख का लट्ठा नहीं देख पाते.
प्रभु हमारा मार्गदर्शन करें !
प्रभु हमें आपकी आवश्यकता है.