यीशु·7 / 61

फरीसी और टैक्स कलेक्टर का दृष्टान्त

यीशु लोगों को गन्नेसरत नामक झील के किनारे लगी नाव पर सिखाते है। वह दृष्टान्तो में बात करते है, वह फरीसी और चुंगी लेने वाले का मंदिर में प्रार्थना के जोने का उदाहरण लेते है। वह दोनो व्यक्ति विभिन्न् तरिके से प्रर्थना करते है। इस कहानी मे फरीसी अपने गुणो का गुणगान करते हुए आदर योग्य पहलुओं को बताता है। वह परमेश्वर का धन्यवाद करता है कि वह दूसरों की तरह लालची, कपटी या व्यभिचारी नहीं है। वह खासतौर पर चुंगी लेने वाले की ओर ध्यान देकर परमेश्वर का धन्यवाद करता है कि वह उसके जैसा नहीं है। फरीसी बेधड़क होकर प्रभु से जो कुछ वह करता है, कहता है, वह हफ्ते में दो दिन उपवास करता है और अपनी आय का दश्मांश भी देता है। चुंगी लेने वाल वेदी से दूर खड़ा होता है। सिर झुकाए, अपनी छाती पीटता है। वह सिर्फ यह प्रार्थना करता है, ‘‘परमेश्वर, मुझ पापी पर दया कर’’।

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Luke 18:9-14
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Hindi (हिंदी)
एक बार दो व्यक्ति प्रार्थना करने मंदिर गये, एक धार्मिक गुरू और दूसरा चुंगी लेने वाला . धार्मिक गुरू अलग खड़ा होकर यूं प्रार्थना करने लगा, परमेश्वर मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि मैं दूसरों की तरह लालची, बेईमान और व्यभिचारी नहीं, मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि मैं इस चुंगी लेने वाले जैसा नहीं. सप्ताह में दो बार उपवास रखता हूँ. आमदनी का दसवां अंश आपको देता हूँ.. परन्तु चुंगी लेने वाले ने दूर ही खड़े होकर स्वर्ग की ओर आँखें उठाये बिना अपनी छाती पीट - पीट कर ये कहा, हे परमेश्वर, मुझ पापी पर दया कर. मैं तुमसे कहता हूँ. धार्मिक गुरू नहीं परन्तु यही चुंगी लेने वाला परमेश्वर की दृष्टि में धर्मी ठहरा और अपने घर गया. जो अपने आपको बड़ा मानेगा. वो छोटा किया जायेगा, परन्तु जो अपने आपको छोटा मानेगा वो बड़ा किया जायेगा.
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