खंड
शैतान यीशु की परीक्षा लेता है
2 मि॰FHD
यीशु·5 / 61क्लिप 5 / 61
शैतान यीशु की परीक्षा लेता है
यीशु के बपपिस्मा लेने के बाद, आत्मा उन्हें जंगल ले गई। शैतान द्वारा लगातार परीक्षित होते हुए उन्होंने वहाँ 40 दिन बिताए। उस समय यीशु निहार रहे। शैतान ने यीशु कि परीक्षा करनी चाही परन्तु यीशु ने उसका सामना पवित्र शास्त्र के वचनो द्वारा किया।
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प्रतिलेख
Hindi (हिंदी)
लगभग तीस वर्ष की आयु में यीशु ने अपनी सेवा आरम्भ की। पवित्र आत्मा से परिपूर्ण यीशु यरदन से लौटे।
आत्मा से प्रेरित वो चालीस दिन तक ब्याबान में रहे, जहाँ शैतान उनकी परीक्षा करता रहा।
इस बीच उन्होंने कुछ नहीं खाया.
तब शैतान ने उनसे कहा.
यदि आप परमेश्वर के पुत्र हैं तो इस पत्थर को रोटी बन जाने की आज्ञा दें.
ये लिखा है.
मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं पर परमेश्वर के हर वचन से जीवित रहेगा।
तब शैतान उन्हें ऊँचे स्थान पर ले गया और पलभर में जगत के सारे राज्य दिखाए।
ये सब अधिकार और वैभव मैं आपको दूँगा।
ये सब मुझे सौंपा गया है और जिसे मैं चाहूँ उसे ये सब दे सकता हूँ।
यदि आप मुझे प्रणाम करें तो ये सब आपका हो जायेगा।
ये भी लिखा है कि तुम प्रभु अपने परमेश्वर की उपासना करो
और तुम केवल उन्हीं की सेवा करो.
फिर शैतान उन्हें यरूशलेम अराधनालय के गुंबद पर ले गया.
यदि आप परमेश्वर के पुत्र हैं तो अपने आपको यहां से गिरा दे
क्योंकि पवित्र शास्त्र में लिखा है कि परमेश्वर अपने स्वर्गदूतों को आज्ञा देगें
कि वे आपकी रक्षा करें वे आपको हाथों हाथ उठा लेगें ताकि आपके पांव को पत्थर से ठेस तक न लगे.
धर्मशास्त्र कहता है
तुम प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न करों.