खंड
दाख की बारी और किरायेदारों का दृष्टान्त
2 मि॰FHD
यीशु·40 / 61क्लिप 40 / 61
दाख की बारी और किरायेदारों का दृष्टान्त
तब यीशु ने एक ऐसे पुरुष की कहानी सुनाई जिसने एक दाख की बारी लगाई। उसने उस बारी में मजदूरों को काम पर लगाया। तब यीशु ने कहा- कि राजमिस्त्रियों ने जिस पत्थर को निकम्मा ठहराया था वही कोने का सिरा हो गया। तब उसने आगे कहा कि जो उस पत्थर पर गिरेगा वह टूट जाएगा और वह पत्थर जिस पर गिरेगा उसे चकनाचूर कर डालेगा।
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प्रतिलेख
Hindi (हिंदी)
एक बार एक मनुष्य ने अंगूर की बारी लगाई
उसे ठेके पे देकर
लम्बे समय के लिये कही चला गया.
जब अंगूरों को इकट्ठा करने का समय आया तो
उसने अपने एक दास को भेजा
कि फसल में उसका हिस्सा उसको मिल सके.
परन्तु ठेकेदारों ने उसे पीटकर खाली हाथ भगा दिया
तब उसने दूसरे दास को भेजा.
पर ठेकेदारों ने उसे भी पीटा और अपमानित करके उसे भी खाली हाथ लौटा दिया.
तब उसने तीसरे दास को भेजा किन्तु ठेकेदारों ने उसे मारपीट के बाग के बाहर ढकेल दिया,
तब अंगूर बारी के मालिक ने अपने मन में सोचा, अब मैं क्या करूँ? अब मैं अपने प्रिय पुत्र को भेजूँगा.
अवश्य ही वे उसका आदर करेंगे,
परन्तु ठेकेदारों ने उसे आते देखकर आपस में कहा,
ये तो मालिक का पुत्र है,
उसे मार डालें, तो ये जायदाद हमारी हो जाएगी.
हमें और बतायें.
उन्होंने उसे बारी के बाहर निकाला,
और मार डाला.
अब देखो मालिक उन ठेकेदारों के साथ क्या करेगा?
वो आकर उनको मारेगा और अंगूर की बारी दूसरे को दे देगा.
तो इस वचन का क्या अभिप्राय है
जिस पत्थर को राज मिस्त्रीयों ने निकम्मा जान नकार दिया,
वही पत्थर सबसे श्रेष्ठ सिद्ध हुआ
जो कोई इस पत्थर पर गिरेगा वो चकनाचूर हो जाएगा
और यदि ये पत्थर किसी पर भी गिरेगा
तो उसे पीस कर रख देगा.