खंड
सब्त के दिन चंगाई
2 मि॰FHD
30 / 61क्लिप 30 / 61यीशु · 61 अध्याय
सब्त के दिन चंगाई
एक लड़के ने यीशु से परमेश्वर के राज्य के बारे में और बताने के लिए कहा। यीशु ने आराधनालय में शिक्षा दी की विश्वासियों को डरना नहीं चाहिए। परमेश्वर की प्रसन्ता उन्हें राज्य देने में है। उन्हें खुले दिल से देना चाहिए क्योंकि उनका खज़ाना पृथ्वी पर नहीं बल्कि कहीं और है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वह अपनी वस्तुएं बेच कर ज़रुरत मंदों की सहायता करें। उन्होने उनसे आग्रह किया कि वह अपना ख़ज़ाना स्वर्ग में बनायें जो कभी भी ख़त्म नहीं होगा। क्योंकि जहाँ खज़ाना है वहीं हमारा मन भी रहता है।
प्रश्नसंबंधित प्रश्न
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साझा करेंLuke 12:32-34
Luke 13:10-17
प्रतिलेख
Hindi (हिंदी)
हमें स्वर्ग के राज्य के बारे में बतायें.
क्या और भी कुछ है ?
ऐ मेरे लोगों, भयभीत न हो, परमपिता की ये इच्छा है कि तुम्हें राज्य दें।
अपना सब कुछ बेचकर पैसा गरीबों को दान कर दो.
और ऐसे बटुए बनाओ जो फटते नहीं स्वर्ग में धन इकट्ठा करो जहाँ वो घटता नहीं.
क्योंकि कोई चोर वहाँ नहीं पहुँच सकता.
न ही कीड़ा उसे नष्ट कर सकता है.
जहाँ तुम्हारा धन होगा वहीं तुम्हारा मन भी लगेगा.
हे नारी.
तुम अपनी बिमारी से मुक्त हुई.
देखो, देखो ये चंगी हो गयी. ये तो चमत्कार है देखो ये चंगी हो गई.आओ देखो.
प्र प्र प्र परमेश्वर की
महिमा हो.
अट्ठारह साल
परमेश्वर आपको सुखी रखे.
हफ्ते में छह दिनो तक हम काम कर सकते हैं
तो चंगाई के लिये हम इनमें से किसी भी दिन आ सकते है.
मगर विश्राम के दिन नहीं.
अरे कपटियों !
क्या विश्राम के दिन तुम में से हर कोई अपने गधे या बैल को खोलकर उन्हें पानी पिलाने नहीं ले जाता.
और यहां पर यह स्त्री जो अब्राहम के वंश से है और अट्ठारह वर्ष तक शैतान के बंधन में थी.
क्या विश्राम के दिन उसे मुक्त करना उचित न था?