6 / 61यीशु · 61 अध्याय

यीशु वचन की पूर्ति की घोषणा करता है

नाज़रथ वापिस पहुंचकर यीशु आराधनालय जाते हैं। उनसे पवित्र शास्त्र में से पढ़ने को कहा जाता है और उन्हें यशायाह की पुस्तक दि जाती है। उसमें से उन्होंने यशायाह 61:1-2 पढ़ा। यह भविष्यवाणी बताती है की गरीबों को सुसमाचार, बंदी को स्वतंत्रता की घोषणा, अंधों को आँखे, दीन को मुक्त कराने और यह घोषणा कि परमेश्वर का अपने लोगों को बचाने का समय आ गया है। जब वह पढ़ चुके, यीशु घोषणा करते है की यह भविष्यवाणी इसके पढ़े जाने पर पूरी हुई।

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Isaiah 61:1-2
Luke 4:16-19
Luke 4:21-24
Luke 4:28-31
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प्रतिलेख

Hindi (हिंदी)
फिर यीशु नासरत आये जहां वो पले-बढ़े थे. कैसी हो? अच्छी हूँ सब्त यानी विश्राम के दिन नियमानुसार वे अराधनालय गये. और उन्हें यशायाह भविष्यवक्ता की पुस्तक से एक भाग पढ़ने को कहा गया. परमेश्वर का आत्मा मुझ पर है, क्योंकि उन्होंने मुझे दीनों को शुभ सन्देश सुनाने के लिये चुना है। उन्होंने मुझे भेजा है कि मैं बंदियों को मुक्ति और अंधों को दृष्टि पाने का संदेश दूँ. सताये हुऐ लोगो को मुक्त करने के लिये और ये घोषणा करने के लिये कि समय आ गया है जब परमेश्वर अपने लोगों को बचायें। वे ठीक कहते हैं. आज धर्मशास्त्र का ये लेख पूरा हुआ जैसा तुमने अभी सुना. क्या परमेश्वर का वचन सच्चा ठहरा? ये प्रतिज्ञा तो केवल मसीह ही पूरा कर सकते हैं. हम कैसे जानेंगे ? नि:संदेह तुम मुझसे यह कहावत कहोगे - वैद्य जी स्वंयम को चंगा करो। तुम मुझसे यह भी कहोगे, अपने शहर में भी वही करो जैसा हमने सुना कि आपने कफ़रनहूम में किया. मैं तुमसे कहता हूँ कि कोई भी भविष्यवक्ता अपने शहर में सम्मान नहीं पाता. इस प्रकार येशू ने अपना परिचय परमेश्वर द्धारा अभिषिक्त संसार के उद्धारकर्ता के रूप में दिया, परन्तु यहूदियों ने उन्हें मसीहा स्वीकार नहीं किया. उन्हें लोगों ने पहाड़ी से गिराना चाहा, परन्तु वो भीड़ से निकल कर अपनी राह चले गये
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